Thursday, 9 February 2012

रोते देखा

          'रोते देखा'

जब भी मैने तुमको देखा, रोते देखा,
एक पल ना हस्ते देखा,
पलको को भिगोते देखा,
हाथो को मलते देखा
जब भी मैने तुमको -----------!!

विरह की वेदना से जलते देखा,
तड़पते देखा मरते देखा,
खुद को खुद से लड़ते देखा,
संग पिया के ना देखा,
जब भी मैने तुमको -----------!! 

तडपते देखा पिघलते देखा,
जब भी देखा अकेले देखा,
मुरझायी सी कली की भांती,
चेहरे को हमेशा देखा,
प्रफुल्लित कुसुम ना देखा !!

बन कुसुम तुम हस्ती रहो हमेशा,
आज स्वप्न में 'राम' ने तुम्हे पहली वार हस्ते देखा,
ना रोते देखा ना ऑंखो को मलते देखा,
तुम्हे हमेशा हस्ते देखा,
तुम्हे हमेशा हस्ते देखा ------------!!
                               कवि- राम कुमार उइके

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