Monday, 6 February 2012

अटल प्रेम

अटल 'प्रेम'

अब की बार जो जन्म लू साथी,
तुम मेरी हो जाना,
मेरी सखा बनकर के,
साथी मुझे बनाना,
अब की बार जो ----------- बनाना!!

                प्रीत प्रेम सब मिथ्या है,
                कोई रीत नई चलाना,
                अमृत कुछ प्रेम रस का,
                ऐसा मुझे पिलाना,
                अब की बार जो ----------- बनाना!!

जीवन भर न चाहूॅं तुझको,
पर अंत समय तू आ जाना,
मुझको जीवन देकर के तू,
उम्र मेरी बढ़ा जाना,
अब की बार जो ----------- बनाना!!

                द्वेष, क्रोध सब छोड़ के,
                मुझको गले लगा जाना,
                मर जाऊं जो अगर कहीं मैं,
                कब्र पर मेरी ना आना,
                अब की बार जो ----------- बनाना!!

अश्रु धारा को भी तू,
यह बाते समझा देना,
मरकर भी अमर हूॅं मैं,
जीवित उन्हें बता देना,
अब की बार जो ----------- बनाना!!
                                                          कवि:- राम कुमार उइके

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