Monday, 6 February 2012

एक रात




        'एक रात'
एक रात घनघोर सी लगती है,
कभी पास कभी दूर, क्यो ये दूरी लगती है,
जब तुम मिले तो मैने जाना,
तेरी मेरी दोस्ती वर्षो पुरानी लगती है !!

जब प्यार किया तुझे आघोष में लिया,
तब शाम अधूरी लगती है,
एकल जीवन जीना चाहा तो,
जिन्दगी बंजर भूमि लगती है !!


जब मैंने तुझको पाना चाहा तो,
पांव में जंजीर बंधी लगती है,
खुद को जब मिटाना चाहा तो,
तेरी मुस्कान अधूरी लगती है !!

जब "मय" को गले लगाना चाहा तो,
तेरी सूरत उसमे बसा करती है,
अब 'राम' क्या लिखे कविता,
उसके हर शब्द में बस तू ही समायी लगती है,
बस तू ही समायी लगती है -------------

                                                                                               कवि- राम कुमार उइके

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